पंचांग 15 जुलाई 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 जुलाई 2027 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:06
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय16:47
चंद्रास्त03:50 (16 जुल॰)
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृश्चिक 05:39 (16 जुल॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 14:40 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 16:35 (16 जुल॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 05:40 (16 जुल॰) तक, फिर मूल 08:21 (17 जुल॰) तक
योग
शुक्ल 13:03 तक, फिर ब्रह्म 13:35 (16 जुल॰) तक
करण
बालव 14:40 तक, फिर कौलव 03:35 (16 जुल॰) तक, फिर तैतिल 16:35 (16 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल14:19 – 15:57
  • यमगंड06:06 – 07:44
  • गुलिक काल09:23 – 11:01

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:06 – 07:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:23 – 11:01
  • चर(सामान्य)11:01 – 12:40
  • लाभ(शुभ)12:40 – 14:19
  • अमृत(शुभ)14:19 – 15:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
  • शुभ(शुभ)17:36 – 19:14

रात

  • अमृत(शुभ)19:14 – 20:36
  • चर(सामान्य)20:36 – 21:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:40 (16 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)00:40 (16 जुल॰) – 02:02 (16 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:02 (16 जुल॰) – 03:23 (16 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)03:23 (16 जुल॰) – 04:45 (16 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)04:45 (16 जुल॰) – 06:06 (16 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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