पंचांग 22 दिसंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 दिसंबर 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय02:47 (23 दिस॰)
चंद्रास्त13:36
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या 12:14 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 23:41 तक, फिर कृष्ण एकादशी 23:12 (23 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 00:09 (23 दिस॰) तक, फिर स्वाती 00:17 (24 दिस॰) तक
- योग
- शोभन 13:28 तक, फिर अतिगण्ड 11:43 (23 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 12:05 तक, फिर विष्टि 23:41 तक, फिर बव 11:23 (23 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 12:54परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:32 – 13:55
- यमगंड08:24 – 09:47
- गुलिक काल11:10 – 12:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:02 – 08:24
- अमृत(शुभ)08:24 – 09:47
- काल(वर्जित (परंपरा))09:47 – 11:10
- शुभ(शुभ)11:10 – 12:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 13:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:18
- चर(सामान्य)15:18 – 16:40
- लाभ(शुभ)16:40 – 18:03
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:03 – 19:40
- शुभ(शुभ)19:40 – 21:18
- अमृत(शुभ)21:18 – 22:55
- चर(सामान्य)22:55 – 00:33 (23 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:33 (23 दिस॰) – 02:10 (23 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:10 (23 दिस॰) – 03:47 (23 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:47 (23 दिस॰) – 05:25 (23 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:25 (23 दिस॰) – 07:02 (23 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें