पंचांग 21 दिसंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 दिसंबर 2027 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय01:50 (22 दिस॰)
चंद्रास्त12:56
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 00:35 (22 दिस॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 23:41 (22 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 00:25 (22 दिस॰) तक, फिर चित्रा 00:09 (23 दिस॰) तक
- योग
- सौभाग्य 15:33 तक, फिर शोभन 13:28 (22 दिस॰) तक
- करण
- तैतिल 13:11 तक, फिर गर 00:35 (22 दिस॰) तक, फिर वणिज 12:05 (22 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 12:54
- राहु काल15:17 – 16:40
- यमगंड09:47 – 11:09
- गुलिक काल12:32 – 13:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:01 – 08:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:24 – 09:47
- चर(सामान्य)09:47 – 11:09
- लाभ(शुभ)11:09 – 12:32
- अमृत(शुभ)12:32 – 13:55
- काल(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:17
- शुभ(शुभ)15:17 – 16:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:40 – 18:02
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:02 – 19:40
- लाभ(शुभ)19:40 – 21:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:55
- शुभ(शुभ)22:55 – 00:32 (22 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:32 (22 दिस॰) – 02:10 (22 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:10 (22 दिस॰) – 03:47 (22 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:47 (22 दिस॰) – 05:24 (22 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:24 (22 दिस॰) – 07:02 (22 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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