पंचांग 30 दिसंबर 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 दिसंबर 2031 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:05
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय19:38
चंद्रास्त08:01
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मिथुन 10:12 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 03:46 (31 दिस॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 06:19 (1 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 16:56 तक, फिर पुष्य 19:52 (31 दिस॰) तक
- योग
- इन्द्र 15:14 तक, फिर वैधृति 16:02 (31 दिस॰) तक
- करण
- तैतिल 14:31 तक, फिर गर 03:46 (31 दिस॰) तक, फिर वणिज 17:02 (31 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 12:58
- राहु काल15:22 – 16:45
- यमगंड09:51 – 11:14
- गुलिक काल12:36 – 13:59
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:05 – 08:28
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:51
- चर(सामान्य)09:51 – 11:14
- लाभ(शुभ)11:14 – 12:36
- अमृत(शुभ)12:36 – 13:59
- काल(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:22
- शुभ(शुभ)15:22 – 16:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:07
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:07 – 19:45
- लाभ(शुभ)19:45 – 21:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:22 – 22:59
- शुभ(शुभ)22:59 – 00:37 (31 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:51 (31 दिस॰) – 05:28 (31 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:28 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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