पंचांग 31 दिसंबर 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 दिसंबर 2031 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय20:27
चंद्रास्त08:42
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 06:19 (1 जन॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 08:53 (2 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 19:52 तक, फिर आश्लेषा 22:51 (1 जन॰) तक
- योग
- वैधृति 16:02 तक, फिर विष्कम्भ 16:53 (1 जन॰) तक
- करण
- वणिज 17:02 तक, फिर विष्टि 06:19 (1 जन॰) तक, फिर बव 19:36 (1 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:37 – 14:00
- यमगंड08:29 – 09:51
- गुलिक काल11:14 – 12:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:06 – 08:29
- अमृत(शुभ)08:29 – 09:51
- काल(वर्जित (परंपरा))09:51 – 11:14
- शुभ(शुभ)11:14 – 12:37
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:22
- चर(सामान्य)15:22 – 16:45
- लाभ(शुभ)16:45 – 18:08
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:45
- शुभ(शुभ)19:45 – 21:22
- अमृत(शुभ)21:22 – 23:00
- चर(सामान्य)23:00 – 00:37 (1 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (1 जन॰) – 02:14 (1 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:14 (1 जन॰) – 03:52 (1 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:52 (1 जन॰) – 05:29 (1 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:29 (1 जन॰) – 07:06 (1 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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