पंचांग 13 अगस्त 2042

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 अगस्त 2042 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय04:44 (14 अग॰)
चंद्रास्त17:32
मास:
अधिक श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1964 · विक्रम (चैत्रादि) 2099
संवत्सर:
दुंदुभी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन 17:40 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:33 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 22:48 (14 अग॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 23:50 तक, फिर पुष्य 00:47 (15 अग॰) तक
योग
वज्र 06:37 तक, फिर सिद्धि 05:34 (14 अग॰) तक, फिर व्यतीपात 04:51 (15 अग॰) तक
करण
गर 10:36 तक, फिर वणिज 22:33 तक, फिर विष्टि 10:37 (14 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:39 – 14:15
  • यमगंड07:51 – 09:27
  • गुलिक काल11:03 – 12:39

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:15 – 07:51
  • अमृत(शुभ)07:51 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:51
  • चर(सामान्य)15:51 – 17:27
  • लाभ(शुभ)17:27 – 19:02

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:02 – 20:27
  • शुभ(शुभ)20:27 – 21:51
  • अमृत(शुभ)21:51 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:39 (14 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (14 अग॰) – 02:03 (14 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (14 अग॰) – 03:27 (14 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (14 अग॰) – 04:51 (14 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:51 (14 अग॰) – 06:16 (14 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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