पंचांग 9 अक्टूबर 2047
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 अक्टूबर 2047 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय21:55
चंद्रास्त10:43
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 16:59 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 19:18 (10 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 20:32 तक, फिर मृगशीर्ष 23:18 (10 अक्टू॰) तक
- योग
- व्यतीपात 23:32 तक, फिर वरीयान 00:15 (11 अक्टू॰) तक
- करण
- तैतिल 16:59 तक, फिर गर 06:11 (10 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 19:18 (10 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:21 – 13:50
- यमगंड07:55 – 09:24
- गुलिक काल10:53 – 12:21
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:26 – 07:55
- अमृत(शुभ)07:55 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- शुभ(शुभ)10:53 – 12:21
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:19
- चर(सामान्य)15:19 – 16:48
- लाभ(शुभ)16:48 – 18:16
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:16 – 19:48
- शुभ(शुभ)19:48 – 21:19
- अमृत(शुभ)21:19 – 22:50
- चर(सामान्य)22:50 – 00:21 (10 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:21 (10 अक्टू॰) – 01:53 (10 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (10 अक्टू॰) – 03:24 (10 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (10 अक्टू॰) – 04:55 (10 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (10 अक्टू॰) – 06:26 (10 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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