पंचांग 10 अक्टूबर 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अक्टूबर 2047 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय22:47
चंद्रास्त11:33
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृषभ 09:58 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 19:18 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 21:10 (11 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 23:18 तक, फिर आर्द्रा 01:37 (12 अक्टू॰) तक
योग
वरीयान 00:15 (11 अक्टू॰) तक, फिर परिघ 00:34 (12 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 19:18 तक, फिर विष्टि 08:18 (11 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:45
  • राहु काल13:50 – 15:18
  • यमगंड06:26 – 07:55
  • गुलिक काल09:24 – 10:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:26 – 07:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
  • चर(सामान्य)10:52 – 12:21
  • लाभ(शुभ)12:21 – 13:50
  • अमृत(शुभ)13:50 – 15:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:18 – 16:47
  • शुभ(शुभ)16:47 – 18:16

रात

  • अमृत(शुभ)18:16 – 19:47
  • चर(सामान्य)19:47 – 21:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:50
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:21 (11 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)00:21 (11 अक्टू॰) – 01:53 (11 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:53 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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