पंचांग 29 अप्रैल 2049
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
29 अप्रैल 2049 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:08
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय04:38 (30 अप्रैल)
चंद्रास्त16:37
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
- संवत्सर:
- शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 07:01 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 06:07 (30 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:39 (1 मई) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 21:18 तक, फिर रेवती 21:23 (30 अप्रैल) तक
- योग
- वैधृति 18:10 तक, फिर विष्कम्भ 16:32 (30 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 07:01 तक, फिर गर 18:31 तक, फिर वणिज 06:07 (30 अप्रैल) तक, फिर विष्टि 17:49 (30 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57
- राहु काल14:07 – 15:43
- यमगंड06:08 – 07:44
- गुलिक काल09:20 – 10:56
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:08 – 07:44
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:20
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:20 – 10:56
- चर(सामान्य)10:56 – 12:32
- लाभ(शुभ)12:32 – 14:07
- अमृत(शुभ)14:07 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:19
- शुभ(शुभ)17:19 – 18:55
रात
- अमृत(शुभ)18:55 – 20:19
- चर(सामान्य)20:19 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
- काल(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:31 (30 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)00:31 (30 अप्रैल) – 01:55 (30 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:55 (30 अप्रैल) – 03:19 (30 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)03:19 (30 अप्रैल) – 04:43 (30 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)04:43 (30 अप्रैल) – 06:07 (30 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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