पंचांग 30 अप्रैल 2049
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 अप्रैल 2049 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:07
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय05:20 (1 मई)
चंद्रास्त17:32
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
- संवत्सर:
- शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मीन 21:23 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 05:39 (1 मई) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 05:40 (2 मई) तक
- नक्षत्र
- रेवती 21:23 तक, फिर अश्विनी 21:54 (1 मई) तक
- योग
- विष्कम्भ 16:32 तक, फिर प्रीति 15:16 (1 मई) तक
- करण
- विष्टि 17:49 तक, फिर शकुनि 05:39 (1 मई) तक, फिर चतुष्पद 17:36 (1 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57
- राहु काल10:55 – 12:31
- यमगंड15:43 – 17:19
- गुलिक काल07:43 – 09:19
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:07 – 07:43
- लाभ(शुभ)07:43 – 09:19
- अमृत(शुभ)09:19 – 10:55
- काल(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:31
- शुभ(शुभ)12:31 – 14:07
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:19
- चर(सामान्य)17:19 – 18:55
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:55 – 20:19
- काल(वर्जित (परंपरा))20:19 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:07
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:31 (1 मई)
- शुभ(शुभ)00:31 (1 मई) – 01:55 (1 मई)
- अमृत(शुभ)01:55 (1 मई) – 03:19 (1 मई)
- चर(सामान्य)03:19 (1 मई) – 04:43 (1 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:43 (1 मई) – 06:07 (1 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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