पंचांग 10 अगस्त 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अगस्त 2049 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:04
चंद्रोदय16:15
चंद्रास्त03:45 (11 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 01:59 (11 अग॰) तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 22:27 (11 अग॰) तक
नक्षत्र
मूल 18:17 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 15:42 (11 अग॰) तक
योग
वैधृति 07:23 तक, फिर विष्कम्भ 03:42 (11 अग॰) तक, फिर प्रीति 23:41 (11 अग॰) तक
करण
बव 15:37 तक, फिर बालव 01:59 (11 अग॰) तक, फिर कौलव 12:16 (11 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05
  • राहु काल15:52 – 17:28
  • यमगंड09:27 – 11:03
  • गुलिक काल12:39 – 14:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:15 – 07:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:39
  • अमृत(शुभ)12:39 – 14:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:52
  • शुभ(शुभ)15:52 – 17:28
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:28 – 19:04

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:04 – 20:28
  • लाभ(शुभ)20:28 – 21:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:52 – 23:16
  • शुभ(शुभ)23:16 – 00:39 (11 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:39 (11 अग॰) – 02:03 (11 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (11 अग॰) – 03:27 (11 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (11 अग॰) – 04:51 (11 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:51 (11 अग॰) – 06:15 (11 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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