पंचांग 5 दिसंबर 2063

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 दिसंबर 2063 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:52
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय17:25
चंद्रास्तनहीं
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1985 · विक्रम (चैत्रादि) 2120
संवत्सर:
सुभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 01:35 (6 दिस॰) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 00:26 (7 दिस॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 09:33 तक, फिर रोहिणी 09:19 (6 दिस॰) तक
योग
सिद्ध 05:00 (6 दिस॰) तक, फिर साध्य 02:49 (7 दिस॰) तक
करण
विष्टि 14:00 तक, फिर बव 01:35 (6 दिस॰) तक, फिर बालव 13:04 (6 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:47परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:24 – 13:48
  • यमगंड08:15 – 09:38
  • गुलिक काल11:01 – 12:24

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:52 – 08:15
  • अमृत(शुभ)08:15 – 09:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:38 – 11:01
  • शुभ(शुभ)11:01 – 12:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:48
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:48 – 15:11
  • चर(सामान्य)15:11 – 16:34
  • लाभ(शुभ)16:34 – 17:57

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:34
  • शुभ(शुभ)19:34 – 21:11
  • अमृत(शुभ)21:11 – 22:48
  • चर(सामान्य)22:48 – 00:25 (6 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:25 (6 दिस॰) – 02:02 (6 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (6 दिस॰) – 03:39 (6 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)03:39 (6 दिस॰) – 05:16 (6 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:16 (6 दिस॰) – 06:53 (6 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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